सौभाग्य से मिलता है सेवा का अवसर
दोस्तो यह मेरी स्वयं की यात्रा है। चलो कुछ अच्छा करते हैं, कहना कितना आसान है, है ना।
इस खबर को एक न्यूज पेपर की तरफ से प्रकाशित भी किया गया था।
https://www.youtube.com/watch?v=HFQ40qwPgE0
हम सभी ईश्वर की संतान है…अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा
जितने भी लोग है वे अपने से संबंध रखते हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि हम उनसे आगे निकल
गए और वे थोड़े पीछे रह गए। बात हो रही है फुटपाथ पर रहने वाले, झुग्गी-झोंपडी
में रहने वाले-वृद्धा-अपंग, माँगने
वाले गरीब लोगों,
मजदूरों, जरुरतमंदो, छोटे-मोटे
कलाकारों, गरीब परिवार के बच्चो और महिलाओं की।
दिसम्बर से ठंड पूरे भारत में पड़नी शुरु हो जाती है। भारत
सरकार, राज्य सरकार, जिला
स्तर पर तो कितने ही लोग आम जन के लिए शिविर और टेंट लगाते है। कुछ लोग हेल्पिंग ग्रुप
बनाकर मानवता की भावना से इन लोगों की सहायता भी करते हैं। पर फिर भी कई लोग जिनको मदद नहीं पहुँचती जो शारीरिक रूप
से कमजोर है ठंड का सामना नहीं कर पाते मर जाते हैं।
हमारा उद्देश्य फुटपाथ पर रहने वाले, झुग्गी-झोंपड़ी
में रहने वाले-वृद्ध-अपंग, गरीब
लोगों, जरूरतमंदों, गरीब
परिवार के छोटे बच्चों,
महिलाओं तक इस बार
सर्दी पड़ने से पहले उन तक कम्बल वितरण करने करने की मंशा हैं।
और मैनें बिना देर किए एक टीम बनाई और कम्बल की दुकान
से कम्बल को खरीदने का ओर्डर दे दिया। दिसम्बर
11, 2021 को हमारी टीम प्रेम
राज जी, सन्दीप पुरोहित जी, गिरिश
जी, शिवेन जी के साथ रात,
जिसका पारा 10 डिग्री था, इस मुहिम का हिस्सा बने। ऊपर की फोटो में हमारी टीम के सदस्य जो एक 5-6
साल के बच्चे को कम्बल ओढा रहे हैं
जरा सोचो ..........
रेलवे
स्टेशन के सामने, महात्मा गाँधी अस्पताल
वाली रोड का बस स्टॉप, जहां कैबिन के पीछे एक शक्स सिकुड़ के
बैठा है और एक बिल्कुल इसके सामने बैठा है जिसके पास बिछाने को भी कुछ नहीं था।
उसको हमने दो कम्बल दिए। ऐसे बहुत से बुजुर्ग एवं महिलाएं थीं जो इस सर्दी का सितम
सह रही थीं। ऐसे में हम और आपके सहयोग से उन्हें कुछ राहत दे पाए।
कुछ लोग आर्थिक दृष्टि से बहूत कमजोर होते है, वे
हमसे कुछ माँगते नहीं है,
बड़ी दयनीय स्थिति होती
हैं, एक समय का खाना जुटाना भी मुश्किल होता है उनके लिए। मेहनत
भी करते है तब भी उनको कुछ मिलता नहीं। कई लोग भुखे रह जाते है और रात में अखबार ओढ़
कर सो जाते हैं। पर ऐसे लोग खुद्दार होते हैं। किसी की मदद लेते ही नहीं हैं।
हमारी
टीम उन्हीं लोगों तक मदद पहूँचाना चाहती थी और ऐसे ही लोगों तक कम्बल बाँटकर उनकी सर्द
रात को अच्छा करने की कोशिश में थी।
Prenadayak kahani
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