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सौभाग्य से मिलता है सेवा का अवसर

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नेक राह के मुसाफिर हम सुबह से रात तक अपनी व्यक्तिगत व पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझे रहते है , ऐसे में हम अपने सामाजिक कर्तव्य को भूल जाते हैं। ईश्वर ने हमें इस योग्य जरूर बनाया है कि हम थोड़े - थोड़े सहयोग से किसी जरूरतमंद की मदद कर सकें , यह सेवा का सौभाग्य हमें किसी न किसी के माध्यम से मिलता रहता है। सर्दी में ठिठुरते जरूरतमंदों के दर्द को देखकर कुछ लोग अपने दो कदम बढ़ाकर मुहिम शुरू कर देते है देखते ही देखते वह कारवाँ बन जाती है , बड़े कार्य की शुरुआत हमेशा पहले दो कदम से होती हैं , कुछ लोग इस कहावत को सही साबित कर देते है।   एक ऐसा ही मुहिम नैक राह के मुसाफिर के टीम लीडर स्वरुप जी सोलंकी सर और केशव जी सर के सहयोग से पूर्ण हुआ।   इन लोगों ने कुछ मित्रगणों का एक ग्रुप बनाया इस समूह में साथियों ने दिल खोलकर सहयोग किया है , जरूरतमंदों के लिए 100 से भी ज्यादा कम्बल खरीदना अपने आप में प्रेरणादायक व अनुकरणीय कार्य था।     " वस्त्रदान अभियान" में 10 दिसम्बर ( शनिवार ) को रात्रि 8 बजे से जोधपुर शहर के प्रमुख स्थानों पर जरूरतमंद लोगों को सर्दी से बचाव हेतु कम्बल ...

चलो कुछ अच्छा करते है कि एक छोटी - सी यात्रा

 चलो कुछ अच्छा करते है कि एक छोटी - सी यात्रा

 दोस्तो यह मेरी स्वयं की यात्रा है। चलो कुछ अच्छा करते हैं, कहना कितना आसान है, है ना।

इस खबर को एक न्यूज पेपर की तरफ से प्रकाशित भी किया गया था। 


https://www.youtube.com/watch?v=HFQ40qwPgE0 

चलो कुछ अच्छा करते हैं” मुहिम के तहत युवाओं द्वारा जरूरतमंदों में वितरित किए गए कंबल



पर जब हम अपने आस पास लाचार, मजबूर, बेबस को देखते हैं तो दिल के किसी कोने से दया की आहट सुनाई देती है और कहती है कि मुझे कुछ करना चाहिए। पर हमारी ये छोटी सी जेब कहती है कि हम अकेले क्या कर लेंगे? पर यही सोच जब सामूहिक बन कर उभरती है तो जो हमारे दिल को जो तसल्ली मिलती है वो हमारी टीम ने कल रात को महसूस की।

हम सभी ईश्वर की संतान है…अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा जितने भी लोग है वे अपने से संबंध रखते हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि हम उनसे आगे निकल गए और वे थोड़े पीछे रह गए। बात हो रही है फुटपाथ पर रहने वाले, झुग्गी-झोंपडी में रहने वाले-वृद्धा-अपंग, माँगने वाले गरीब लोगों, मजदूरों, जरुरतमंदो, छोटे-मोटे कलाकारों, गरीब परिवार के बच्चो और महिलाओं की।

दिसम्बर से ठंड पूरे भारत में पड़नी शुरु हो जाती है। भारत सरकार, राज्य सरकार, जिला स्तर पर तो कितने ही लोग आम जन के लिए शिविर और टेंट लगाते है। कुछ लोग हेल्पिंग ग्रुप बनाकर मानवता की भावना से इन लोगों की सहायता भी करते हैं।  पर फिर भी कई लोग जिनको मदद नहीं पहुँचती जो शारीरिक रूप से कमजोर है ठंड का सामना नहीं कर पाते मर जाते हैं।

हमारा उद्देश्य फुटपाथ पर रहने वाले, झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले-वृद्ध-अपंग, गरीब लोगों, जरूरतमंदों, गरीब परिवार के छोटे बच्चों, महिलाओं तक इस बार सर्दी पड़ने से पहले उन तक कम्बल वितरण करने करने की मंशा हैं।



और मैनें बिना देर किए एक टीम बनाई और कम्बल की दुकान से कम्बल को खरीदने का ओर्डर दे दिया। दिसम्बर 11, 2021 को हमारी टीम प्रेम राज जी, सन्दीप पुरोहित जी, गिरिश जी, शिवेन जी के साथ रात, जिसका पारा 10 डिग्री था, इस मुहिम का हिस्सा बने। ऊपर की फोटो में हमारी टीम के सदस्य जो एक 5-6 साल के बच्चे को कम्बल ओढा रहे हैं  जरा सोचो  ..........


रेलवे स्टेशन के सामने, महात्मा गाँधी अस्पताल वाली रोड का बस स्टॉप, जहां कैबिन के पीछे एक शक्स सिकुड़ के बैठा है और एक बिल्कुल इसके सामने बैठा है जिसके पास बिछाने को भी कुछ नहीं था। उसको हमने दो कम्बल दिए। ऐसे बहुत से बुजुर्ग एवं महिलाएं थीं जो इस सर्दी का सितम सह रही थीं। ऐसे में हम और आपके सहयोग से उन्हें कुछ राहत दे पाए।

कुछ लोग आर्थिक दृष्टि से बहूत कमजोर होते है, वे हमसे कुछ माँगते नहीं है, बड़ी दयनीय स्थिति होती हैं, एक समय का खाना जुटाना भी मुश्किल होता है उनके लिए। मेहनत भी करते है तब भी उनको कुछ मिलता नहीं। कई लोग भुखे रह जाते है और रात में अखबार ओढ़ कर सो जाते हैं। पर ऐसे लोग खुद्दार होते हैं। किसी की मदद लेते ही नहीं हैं।

हमारी टीम उन्हीं लोगों तक मदद पहूँचाना चाहती थी और ऐसे ही लोगों तक कम्बल बाँटकर उनकी सर्द रात को अच्छा करने की कोशिश में थी।


https://www.youtube.com/watch?v=HFQ40qwPgE0


मैं दूर से आता हूँ। तब रास्ते में कई लोगों को देखता हूँ जिन्हें अगर मैं कम्बल नहीं ओढ़ाऊ तो उन्हें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पढ़ेगा...वो मेरे कम्बल ना बाँटने से भी रह लेंगे। पर अगर आप सभी मेरे मित्रगण की तरफ से कम्बल जायेगा तो उनका कुछ तो भला होगा। हम बंद कमरे में भी दो कम्बल ओढ़ कर सोते है फिर भी ठंड जाती नहीं है और जिनके घर नहीं है
, जो फुटपाथ पर सोते है। जो बेघर है। मैं उनके लिए सोच रहा हूँ। इसी भावना से बनाया गया मेरा ग्रुप काम कर गया। और मेरे मित्रगणो की मदद से हम कम्बल बाँटने का कार्य कर पाए। जरुरतमंदो के लिए की गई मेरी पहल एक शुरूआत होगी और यह निरन्तर चलती रहेगी। 

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