सौभाग्य से मिलता है सेवा का अवसर
राम राम दोस्तों आप सभी का हार्दिक स्वागत है…अभिनन्दन है…
ब्रह्माजी ने कहा
– अब मैं हरिवंश का वर्णन करूँगा, जो भगवान् कृष्ण के महात्म्य से परिपूर्ण होने के
कारण श्रेष्ठतम है।
पृथिवी पर धर्म आदि की रक्षा और अधर्मादि
विनाश के लिए वसुदेव तथा देवकी से कृष्ण और बलराम का प्रादुर्भाव हुआ।
जन्म के कुछ ही दिन
बाद कृष्ण ने पूतना के स्तनों को दृढ़तापूर्वक पीकर उसे मृत्यु के पास पहुँचा दिया था।
तद्नन्तर शकट (छकडे़) को बालक्रीडा में उलटकर सभी को विस्मित करते हुए इन्होंने यमलार्जुन-उद्धार,
कालियानाग-दमन, धेनुकासुर-वध, गोवर्धन-धारण आदि अनेक लीलाएँ की और इन्द्र द्वारा पूजित
होकर पृथिवी को भार से विमुक्त किया तथा अर्जुन की रक्षा के लिए प्रतिज्ञा की।
इनके द्वारा अरिष्टासुर आदि अनेक बलवान्
शत्रु मारे गए। इन्होंने केशी नामक दैतय का वध किया तथा गोपों को संतुष्ट किया। उसके
बाद चाणूर और मुष्टिक नामक मद्र इनके द्वारा ही पराजित हुए। ऊँचे मंच पर अवस्थित कंस
को यहाँ से नीचे पटककर इन्होंने ही मारा था।
श्रीकृष्ण की रुक्मणी, सत्यभामा आदि आठ प्रधान
पत्नियाँ थाी। इनके अतिरिक्त महात्मा श्री कृष्ण की सोलह हजार अन्य स्त्रियाँ थी। उन
स्त्रियों से उत्पन्न हुए पुत्र-पौत्रों की संख्याा सैकड़ों-हजारों में थी। रुक्मणी
के गर्भ से प्रद्युम्न उत्पन्न हुए, जिन्होने शम्बरासुर का वध किया था। इनके पुत्र
अनिरुद्ध हुए, जो वाणासुर की पुत्री उषा के पति थे। अनुरुद्ध के विवाह में कृष्ण और
शड्क का महाभयंकर युद्ध हुआ और इसी युद्ध में हजार भुजाओं वाले वाणासुर की दो भाजाओ
को छोड़कर शेष सभी भुजाएँ कृष्ण के द्वारा काट डाली गई।
नरकासुर का वध इन्हीं महात्मा श्री कृष्ण
ने किया था।
नन्दनवन से बलात् पारिजात-वृक्ष
सत्यभामा के लिए ये ही उखाड़कर लाए थे। बल नामक दैत्य, शिशुपाल नामक राजा तथा द्विविद
नामक बन्दर का वध इन्हीं के द्वारा हुआ था।
अनुरुद्ध के वज्र नाम का पुत्र हुआ। कृष्ण
के स्वर्गरोहरण के पश्चात् वही इस वंश का राजा बना था सान्दीपति नामक मुनि कृष्ण के
गुरु थे। कृष्ण ने ही गुरु सान्दीपन को पुत्रप्राप्ति की अभिलाषा पूर्ण किया था। मथुरा
में उग्रसेन और देवताओं की रक्षा इन्होंने ही की थी। (अध्याय 144) – रेफरेन्स गरुडपुराण
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteबहुत अच्छे
ReplyDeleteमहमूद
ReplyDeleteIski word bhi bhejo
ReplyDeleteBahot Badhiyaa Sir...
ReplyDeleteMaja aa gya padh ke...