सौभाग्य से मिलता है सेवा का अवसर
गरुड़पुराण की महत्ता
परिचय :-
गरुड़ पुराण वैष्णव सम्प्रदाय से सम्बन्धित एक महापुराण है।
यह सनातन धर्म में मृत्यु के बाद सद्गति प्रदान करने वाला माना जाता है। अठारह
पुराणों में गरुड़महापुराण का अपना एक विशेष महत्व है। इसके अधिष्ठातृदेव भगवान
विष्णु है। गरूड़ पुराण में विष्णु-भक्ति का विस्तार से वर्णन है।
हे रूद्र। यह गरुड़ महापुराण विद्या यश सौंदर्य, लक्ष्मी, विजय, आरोग्य आदि का कारक है। जो
मनुष्य इसका पाठ करता है, या सुनता है, वह सब कुछ जान जाता है। और अंत
में उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
जो मनुष्य
एकाग्रचित्त होकर इस महापुराण का पाठ करता है, सुनता
है अथवा सुनाता है, जो इसको लिखता है, या
पुस्तक के ही रूप में इसे अपने पास रखता है।
वह यदि धर्मार्थी है तो उसे धर्म की प्राप्ति होती है, यदि वह अर्थ का अभिलाषी है तो उसे अर्थ प्राप्त करता है।
जिस मनुष्य के हाथ
में यह गरुड़ महापुराण विद्यमान है, उसके हाथ में ही नीतियों का
कोर्स है। जो प्राणी इस पुराण का पाठ करता है।
या इसको सुनता है। वह भोग और मोक्ष
दोनों को प्राप्त कर लेता है।
इस महापुराण को
पढ़ने एवं सुनने से मनुष्य के धर्म अर्थ काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थ की सिद्धि हो जाती है।
इस महापुराण का पाठ करके या इसको सुन कर के पुत्र चाहने
वाला पुत्र प्राप्त करता है तथा कामना का इच्छुक अपनी कामना प्राप्ति में सफलता
प्राप्त कर लेता है।
विद्यार्थी को
विद्या, विजिगिषु को विजय, ब्रहमहत्यादी से युक्त पापी पाप से विशुधि को प्राप्त होता है।
बंध्या स्त्री
पुत्र, कन्या सज्जन पति, श्रेमर्थी श्रेम तथा भोग चाहने वाला भोग प्राप्त करता है। मंगल की कामना करने वाले व्यक्ति अपना मंगल।
गुणों का इच्छुक व्यक्ति गुण। काव्य करने का अभिलाषी मनुष्य कवित्वशक्ति और जीवन
का सार तत्व चाहने वाला व्यक्ति सार तत्व प्राप्त करता है।
ज्ञानार्थी संपूर्ण संसार का मर्दन करने वाला ज्ञान प्राप्त
करता है। पक्षी श्रेष्ठ गरुड़ के द्वारा कहा गया यह गरुड़ महापुराण धन्य है यह तो
सब का कल्याण करने वाला है।
जो मनुष्य इस महापुराण के एक भी श्लोक का पाठ करता है उसकी
अकाल मृत्यु नहीं होती, इसके
मात्र आधे श्लोक का पाठ करने से निश्चित ही दुष्ट शत्रु का नाश हो जाता है।
इसलिए यह गरुड़ महापुराण मुख्य और शाश्वत सम्मतपुराण है।
विष्णु धर्म के प्रदर्शन में गरुड़ पुराण के समान दूसरा कोई भी पूराण नहीं है।
जैसे देवों में जनार्दन श्रेष्ठ और आयुध में सुदर्शन
श्रेष्ठ है वैसे ही पुराणों में यह गरुड़ महापुराण हरि के तत्व निरूपण में मुख्य
कहा गया है।
इस गरुड़ महापुराण में हरि ही प्रतिपाद्य है इसलिए हरि ही
नमस्कार करने योग्य है हरि ही शरण्य हैं और वह हरि ही सब प्रकार से सेवा करने
योग्य है।
गरुड़ महापुराण बड़ा ही पवित्र और पुण्य दायक है यह सभी
पापों का विनाशक एवं सुनने वालों के समस्त कामनाओं का पूरक है इसका सदैव श्रवण
करना चाहिए। जो मनुष्य इस महापुराण को सुनता है, या इसका पाठ करता है, वह निष्पाप होकर यमराज की भयंकर
यातनाएं को तोड़कर स्वर्ग को प्राप्त करता है।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:
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