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सौभाग्य से मिलता है सेवा का अवसर

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नेक राह के मुसाफिर हम सुबह से रात तक अपनी व्यक्तिगत व पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझे रहते है , ऐसे में हम अपने सामाजिक कर्तव्य को भूल जाते हैं। ईश्वर ने हमें इस योग्य जरूर बनाया है कि हम थोड़े - थोड़े सहयोग से किसी जरूरतमंद की मदद कर सकें , यह सेवा का सौभाग्य हमें किसी न किसी के माध्यम से मिलता रहता है। सर्दी में ठिठुरते जरूरतमंदों के दर्द को देखकर कुछ लोग अपने दो कदम बढ़ाकर मुहिम शुरू कर देते है देखते ही देखते वह कारवाँ बन जाती है , बड़े कार्य की शुरुआत हमेशा पहले दो कदम से होती हैं , कुछ लोग इस कहावत को सही साबित कर देते है।   एक ऐसा ही मुहिम नैक राह के मुसाफिर के टीम लीडर स्वरुप जी सोलंकी सर और केशव जी सर के सहयोग से पूर्ण हुआ।   इन लोगों ने कुछ मित्रगणों का एक ग्रुप बनाया इस समूह में साथियों ने दिल खोलकर सहयोग किया है , जरूरतमंदों के लिए 100 से भी ज्यादा कम्बल खरीदना अपने आप में प्रेरणादायक व अनुकरणीय कार्य था।     " वस्त्रदान अभियान" में 10 दिसम्बर ( शनिवार ) को रात्रि 8 बजे से जोधपुर शहर के प्रमुख स्थानों पर जरूरतमंद लोगों को सर्दी से बचाव हेतु कम्बल ...

ध्यान (मैडिटेशन) क्यों करें? कितना करें? समूह में या अकेले??


सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक आईस्टांईन नें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहा था, "एक अणु के विधटन से लगातार असंख्य अणुओं का विधटन होता है, इसी को हम अणु विस्फोट कहते है।" 
यही सूत्र हमारे ऋषि, मुनियों ने हमें हजारों साल पहले दिया था।
मस्तिष्क की शक्ति को ध्यान की सहायता से कई गुना बढ़ाया जा सकता है और जीवन के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। अपार असीम शक्तियों की प्राप्ति की जा सकती है। 
40 दिनों तक ध्यान करते रहने के बाद ध्यान ‍की शक्ति का अहसास होना शुरू हो जाता है। व्यक्ति स्वयं को ऊर्जावान और हमेशा तरोताजा महसूस करता है। मस्तिष्क अच्छे तरीके से सक्रिय होकर सकारात्मक सोच का निर्माण करता है।

ध्यान से हमे अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है। 

जब 100 लोग एक साथ एक तरह की साधना करते हैं तो उत्पन्न लहरें 5 कि.मी.तक फैलती है और नकारात्मकता नष्ट कर सकारात्मकता का निर्माण करती है। आज पृथ्वी पर केवल 4% लोग ही ध्यान करते हैं, लेकिन बचे 96% लोंगो को इसका पॉजिटिव इफेक्ट होता है। अगर हम भी लगातार 90 दिनो तक ध्यान करें तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे और हमारे परिवार पर दिखाई देगा। अगर पृथ्वी पर 10% लोंग ध्यान करनें लगे तो पृथ्वी पर विद्यमान लगभग सभी समस्याओं को नष्ट करने की ताकत ध्यान में है।


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