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सौभाग्य से मिलता है सेवा का अवसर

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नेक राह के मुसाफिर हम सुबह से रात तक अपनी व्यक्तिगत व पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझे रहते है , ऐसे में हम अपने सामाजिक कर्तव्य को भूल जाते हैं। ईश्वर ने हमें इस योग्य जरूर बनाया है कि हम थोड़े - थोड़े सहयोग से किसी जरूरतमंद की मदद कर सकें , यह सेवा का सौभाग्य हमें किसी न किसी के माध्यम से मिलता रहता है। सर्दी में ठिठुरते जरूरतमंदों के दर्द को देखकर कुछ लोग अपने दो कदम बढ़ाकर मुहिम शुरू कर देते है देखते ही देखते वह कारवाँ बन जाती है , बड़े कार्य की शुरुआत हमेशा पहले दो कदम से होती हैं , कुछ लोग इस कहावत को सही साबित कर देते है।   एक ऐसा ही मुहिम नैक राह के मुसाफिर के टीम लीडर स्वरुप जी सोलंकी सर और केशव जी सर के सहयोग से पूर्ण हुआ।   इन लोगों ने कुछ मित्रगणों का एक ग्रुप बनाया इस समूह में साथियों ने दिल खोलकर सहयोग किया है , जरूरतमंदों के लिए 100 से भी ज्यादा कम्बल खरीदना अपने आप में प्रेरणादायक व अनुकरणीय कार्य था।     " वस्त्रदान अभियान" में 10 दिसम्बर ( शनिवार ) को रात्रि 8 बजे से जोधपुर शहर के प्रमुख स्थानों पर जरूरतमंद लोगों को सर्दी से बचाव हेतु कम्बल ...

ध्यान का महत्व

दो शक्स कार में बैठकर कहीं जा रहे थे कि अचानक सामने से एक खरगोश उनकी गाड़ी से आकर टकरा जाता है और मर जाता है। पहले कार वाले ने दुसरे से पुछा क्या तुम बता सकते हो यह खरगोश क्यु मर गया। तो दुसरे शक्स ने कहा इसकी मौत आनी थी इसलिए यह मर गया। पहले शक्स ने कहा ये तो बच्चो वाली बाते है। तो पहले शक्स ने कहा तुम बताओ ये क्यु मरा। तब पहले शक्स ने कहा यह अनिर्णय में मर गया। इसे समझ नहीं आ रहा था कि जाना कहां है। ये चाहता तो आगे भी जा सकता था, पिछे भी जा सकता था। तो बच जाता। खरगोश अनिर्णय के कारण मर गया।

आज साधारण मनुष्य भी शायद अनिर्णय में जी रहे है। इसलिए साधारण जीवन ही जी पा रहे है। जीवन तो सभी जीते है पर उन सभी का लक्ष्य होता है। जिनका लक्ष्य ही नहीं होता उसे पता ही नहीं ये मनुष्य जीव क्यु मिला है। इसलिए हमारे सामाजिक जीवन में, व्यवहारिक जीवन में, आध्यात्मिक जीवन में ध्यान का बहुत महत्व है। हमें मनुष्य जीवन मिला है प्रगति करने के लिए। प्रगति हमारे भौतिक शरीर की हो या आत्मा की हो इसके लिए ध्यान करना बहुत जरुरी है।

ध्यान का महत्व
 

  


 

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